शिव-सती-पार्वती कथाहिमवान की पुत्री पार्वती ने शिव को पाने के लिए क्या कियापार्वती ने हिमालय के गौरी-शिखर पर 3,000 वर्ष कठोर तपस्या की — पहले फलाहार, फिर पत्ते और फिर कुछ नहीं (अपर्णा)। शिव-नाम जप, उपवास और पंचाग्नि साधना से शिव का आसन हिला।#पार्वती तपस्या#शिव प्राप्ति#कठोर तप
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी की तपस्या कितनी कठोर थी — क्या-क्या त्यागा?क्रमशः — (1) 1000 वर्ष कन्दमूल-फल, (2) 100 वर्ष केवल साग, (3) कुछ दिन जल-वायु फिर उपवास, (4) 3000 वर्ष केवल सूखे बेलपत्र, (5) पत्ते भी छोड़े — तब 'अपर्णा' नाम पड़ा। शरीर क्षीण हुआ तब ब्रह्मवाणी हुई — 'अब मिलिहहिं त्रिपुरारि' — शिवजी मिलेंगे।
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी ने अपनी तपस्या कहाँ की?पार्वतीजी ने वन (बिपिन) में जाकर तपस्या की। 'उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना॥' — शिवजी के चरणों को हृदय में धारण करके वन में तप करने लगीं। सुकुमार शरीर होने पर भी सब भोग त्याग दिये।#बालकाण्ड#पार्वती तपस्या#वन