पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में फल अर्पित करने का नियमपूजा में विषम संख्या में साबुत, मौसमी और देवता के प्रिय फल अर्पित करें। कटे, सड़े या अधपके फल न चढ़ाएँ। नारियल सर्वाधिक पवित्र फल है। 'इदं फलं मया देव...' मंत्र बोलें।#फल अर्पण#पूजा फल#देवता फल
पूजा विधि एवं कर्मकांडपूजा में विषम संख्या में फल क्यों रखते हैंविषम संख्या (1,3,5,7) में फल रखना इस भाव का प्रतीक है कि भक्त की भक्ति अभी अधूरी है और वह पूर्ण आशीर्वाद की प्रतीक्षा में है। तीन त्रिमूर्ति का, पाँच पंचतत्व का और सात लोकों का प्रतीक है।#विषम संख्या#पूजा फल
दक्षिणामूर्ति साधनादक्षिणामूर्ति पूजा समर्पण मंत्र क्या है?समर्पण मंत्र: 'मया कृत श्री मेधो दक्षिणामूर्ति देवता नित्य पूजा फलं सर्वं... अर्पणमस्तु।'#समर्पण मंत्र#पूजा फल#दक्षिणामूर्ति
भक्ति एवं आध्यात्मपूजा का फल कब तक मिलता है?पूजा का तत्काल फल — मन की शांति। सांसारिक फल प्रारब्ध कर्म, भाव की गहराई और ईश्वर की योजना पर निर्भर। शास्त्र में आशु, मध्यम और दीर्घ तीन प्रकार के फल बताए गए। भगवान देरी करते हैं, मना नहीं करते।#पूजा फल#भक्ति#कर्म