विस्तृत उत्तर
यह एक ऐसा प्रश्न है जो हर उस भक्त के मन में उठता है जो पूजा करता है और परिणाम की प्रतीक्षा करता है। इसका उत्तर कई कारकों पर निर्भर करता है।
शास्त्रीय दृष्टि — हमारे शास्त्रों में पूजा का फल तीन श्रेणियों में वर्गीकृत है: 'आशु फल' (तुरंत), 'मध्यम फल' (कुछ समय बाद) और 'दीर्घ फल' (देर से)। कौन सी श्रेणी का फल मिलेगा यह पूजा की विधि, भाव, और भक्त के कर्म पर निर्भर है।
कर्म का नियम — प्रारब्ध (संचित कर्म) एक महत्वपूर्ण तत्व है। कभी-कभी पूजा का फल पुराने कर्मों के प्रभाव को पहले क्षीण करता है, फिर नया लाभ प्रकट होता है। जैसे घर के भरे टैंक में नया पानी भरो तो पहले पुराना निकलना होगा।
भाव और एकाग्रता — सच्चे भाव से की गई एक मिनट की पूजा, बिना भाव के की गई घंटों की पूजा से अधिक प्रभावशाली होती है।
समय — कुछ मनोकामनाएँ प्रकृति के नियमों के अनुसार समय लेती हैं। एक बीज बोने के बाद फसल के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है — भक्ति भी ऐसे ही काम करती है।
तत्काल फल — पूजा का एक फल तत्काल मिलता है — मन की शांति, एकाग्रता, भीतरी स्थिरता। यह कम महत्वपूर्ण नहीं है।
यह भी जानें — कभी-कभी जो माँगा जाता है वह नहीं मिलता क्योंकि उससे बेहतर कुछ और मिलने वाला होता है। भगवान बड़े हैं, वे हमसे बेहतर जानते हैं।





