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प्रथम दर्शन से जुड़े सभी प्रश्न(4)

प्रथम दर्शन पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी और श्रीरामजी के प्रथम दर्शन में तुलसीदासजी ने कौन सा रस वर्णित किया?

श्रृंगार रस (संयोग पक्ष) — रामजी के नेत्र सीता-मुख के चकोर बने, सीताजी में पवित्र प्रीति जागी पर मृगछौनी-सी भयभीत। दोनों ने प्रेम अनुभव किया पर लोकलाज-मर्यादा से प्रकट नहीं किया। मानस का सबसे मधुर प्रसंग।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीताजी ने श्रीरामजी को पहली बार देखकर क्या अनुभव किया?

नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — 'जनु सिसु मृगी सभीत' — डरी हुई मृगछौनी की तरह चकित होकर चारों ओर देखने लगीं। दर्शन के लिये नेत्र अकुला उठे। जन्म-जन्मान्तर का प्रेम जाग उठा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

पुष्पवाटिका में श्रीरामजी ने सीताजी को पहली बार कब देखा?

जब सीताजी सखियों संग फूल चुन रहीं और कंगन-किंकिनी-नूपुर की ध्वनि सुनाई दी। रामजी ने उस ओर देखा — 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — सीताजी के मुखरूपी चन्द्रमा के लिये नेत्र चकोर बन गये। दोनों का प्रथम दर्शन पुष्पवाटिका में हुआ।

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मंदिर संस्कार

मंदिर में नवजात शिशु को ले जाने का सही समय कब है?

सही समय: सूतक (10-12 दिन) बाद → 40 दिन-4 माह (सर्वप्रचलित) → निष्क्रमण संस्कार (3-4 माह)। आयुर्वेद: 3 माह तक घर, 3-6 माह कम भीड़, 6 माह बाद सामान्य। विधि: मुहूर्त → स्नान → नवीन वस्त्र → दर्शन → आशीर्वाद → कुंकुम/विभूति। सावधानी: भीड़/धुआँ/ध्वनि/बीमारी से बचाएँ।

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