रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी और श्रीरामजी के प्रथम दर्शन में तुलसीदासजी ने कौन सा रस वर्णित किया?श्रृंगार रस (संयोग पक्ष) — रामजी के नेत्र सीता-मुख के चकोर बने, सीताजी में पवित्र प्रीति जागी पर मृगछौनी-सी भयभीत। दोनों ने प्रेम अनुभव किया पर लोकलाज-मर्यादा से प्रकट नहीं किया। मानस का सबसे मधुर प्रसंग।#बालकाण्ड#श्रृंगार रस#प्रथम दर्शन
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने श्रीरामजी को पहली बार देखकर क्या अनुभव किया?नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — 'जनु सिसु मृगी सभीत' — डरी हुई मृगछौनी की तरह चकित होकर चारों ओर देखने लगीं। दर्शन के लिये नेत्र अकुला उठे। जन्म-जन्मान्तर का प्रेम जाग उठा।
रामचरितमानस — बालकाण्डपुष्पवाटिका में श्रीरामजी ने सीताजी को पहली बार कब देखा?जब सीताजी सखियों संग फूल चुन रहीं और कंगन-किंकिनी-नूपुर की ध्वनि सुनाई दी। रामजी ने उस ओर देखा — 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — सीताजी के मुखरूपी चन्द्रमा के लिये नेत्र चकोर बन गये। दोनों का प्रथम दर्शन पुष्पवाटिका में हुआ।#बालकाण्ड#प्रथम दर्शन#पुष्पवाटिका
मंदिर संस्कारमंदिर में नवजात शिशु को ले जाने का सही समय कब है?सही समय: सूतक (10-12 दिन) बाद → 40 दिन-4 माह (सर्वप्रचलित) → निष्क्रमण संस्कार (3-4 माह)। आयुर्वेद: 3 माह तक घर, 3-6 माह कम भीड़, 6 माह बाद सामान्य। विधि: मुहूर्त → स्नान → नवीन वस्त्र → दर्शन → आशीर्वाद → कुंकुम/विभूति। सावधानी: भीड़/धुआँ/ध्वनि/बीमारी से बचाएँ।#नवजात#शिशु दर्शन#प्रथम दर्शन