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बृहदारण्यक से जुड़े सभी प्रश्न(3)

बृहदारण्यक पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

हिंदू दर्शन

असतो मा सद्गमय मंत्र का अर्थ क्या है

बृहदारण्यक 1.3.28: असत् (मिथ्या) → सत् (सत्य); तमस् (अज्ञान) → ज्योति (ज्ञान); मृत्यु → अमृत (मोक्ष)। तीनों = एक ही प्रार्थना — संसार बंधन से मुक्ति। तीन शांति = तीन प्रकार के दुःख (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) की शांति।

#असतो मा#शांति मंत्र#बृहदारण्यक
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में कर्म का सिद्धांत क्या है?

बृहदारण्यक (4/4/5) — 'जैसा कर्म, जैसा आचरण — वैसा ही बनता है।' छान्दोग्य (5/10/7) में देवयान और पितृयान — दो कर्म-मार्ग बताए गए हैं। ईशावास्योपनिषद (1-2) में निर्लेप कर्म का संदेश है। ब्रह्मज्ञान से सभी कर्म-बंधन नष्ट होते हैं।

#कर्म#उपनिषद#कर्मफल
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है?

उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।

#ध्यान#उपनिषद#माण्डूक्य
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