हवन/यज्ञहवन में स्वाहा बोलने का क्या अर्थ है?'सु+आहा'='अच्छी तरह अर्पित।' अग्नि=देवमुख, स्वाहा=अग्नि पत्नी (पुराण)। 'हे अग्नि, देवता तक पहुंचाओ!' 'इदं न मम'='मेरा नहीं'=समर्पण। बिना स्वाहा=अधूरी।#स्वाहा#अर्थ#बोलना
मंत्र विधिमंत्र जप के दौरान कोई बोलने लगे तो क्या करना चाहिए?सामान्यतः बीच में बोलना अनुशंसित नहीं। अत्यावश्यक: रोकें → बात → पुनः जप। अनावश्यक: संकेत दें, बाद में। अनुष्ठान: मौन अनिवार्य। दैनिक: अत्यधिक कठोरता न रखें। निश्चित समय/स्थान = बाधा न्यूनतम। नियमितता > कठोरता।#बाधा#बोलना
जीवन एवं मृत्युक्या मृत्यु के समय व्यक्ति बोल सकता है?गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय सबसे पहले बोलने की शक्ति चली जाती है। व्यक्ति सुन और अनुभव कर सकता है, परंतु बोल नहीं पाता। इसीलिए मरणासन्न व्यक्ति को भगवान का नाम सुनाने का विधान है।#मृत्यु#वाणी#बोलना