भक्ति एवं आध्यात्मभजन कीर्तन से चित्त शुद्धि कैसे होती हैभजन-कीर्तन में लयबद्ध नाम-उच्चारण मस्तिष्क की अल्फा तरंगें सक्रिय करता है जिससे मन शांत होता है। नकारात्मक संस्कारों पर दिव्य संस्कार बनते हैं — यही चित्त-शुद्धि है। भागवत कहता है — जैसे अग्नि स्वर्ण के मल को जलाती है, वैसे कीर्तन पापों को।#भजन कीर्तन#चित्त शुद्धि#संगीत लाभ
भक्ति एवं आध्यात्मभक्ति में संगीत का क्या स्थान हैसंगीत भक्ति का सबसे सहज माध्यम है। नवधा भक्ति में 'कीर्तन' एक प्रमुख अंग है। मीरा, सूरदास, कबीर जैसे संत-भक्त संगीत के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचे। 'नाद ब्रह्म' — ध्वनि ही ईश्वर है — यह योगशास्त्र का सिद्धांत संगीत और भक्ति को एक करता है।
त्योहार पूजानवरात्रि में जागरण की रात कैसे मनाएं?नवरात्रि जागरण: देवी पूजा-आरती → दुर्गा सप्तशती पाठ (सर्वोत्तम) → भजन-कीर्तन → 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' जप → देवी कथा → मध्यरात्रि ध्यान → प्रातः आरती-प्रसाद। अष्टमी/नवमी रात विशेष। सात्त्विक रहें।#नवरात्रि जागरण#रात्रि जागरण#भजन कीर्तन