पौराणिक कथानिर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?भूख बर्दाश्त न कर पाने के कारण भीमसेन साल भर के व्रत नहीं कर सकते थे। महर्षि व्यास के कहने पर उन्होंने सिर्फ इस एक दिन बिना पानी पिए कठिन व्रत किया था, इसलिए इसे 'भीमसेनी एकादशी' कहते हैं।#भीमसेनी एकादशी#पाण्डव एकादशी#वृक अग्नि
व्रत एवं उपवासनिर्जला एकादशी व्रत की विधिनिर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को होती है। इसमें पूरे दिन जल और अन्न दोनों त्यागे जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, पीले वस्त्र, विष्णु पूजा, तुलसी, जल दान और रात्रि जागरण इसके मुख्य अंग हैं। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।
व्रत विधिनिर्जला एकादशी व्रत कैसे रखें?निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (भीमसेनी)। सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जल भी वर्जित। विष्णु पूजा + जप + रात्रि जागरण। द्वादशी में पारण (तुलसी जल → भोजन)। जलदान-पंखा-छाता दान। फल = 24 एकादशियों बराबर। सबसे कठोर व्रत।#निर्जला एकादशी#भीमसेनी एकादशी#ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी