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भूमिका से जुड़े सभी प्रश्न(5)

भूमिका पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध में ब्राह्मणों की भूमिका क्या है?

श्राद्ध में ब्राह्मण — पितरों के प्रतिनिधि, मंत्रोच्चार और विधि-संचालक, दान के पात्र, शुद्धि के साधक और आशीर्वाद-दाता। 'दस दिन तक एक ब्राह्मण को प्रतिदिन मिष्टान्न भोजन कराना चाहिए' — गरुड़ पुराण का आदेश।

#श्राद्ध#ब्राह्मण#भूमिका
महिला एवं धर्म

शक्ति उपासना में स्त्री भूमिका

स्त्री=साक्षात् देवी; शक्ति स्वरूप। कुमारी पूजा=कन्या देवी रूप। तंत्र: स्त्री=गुरु/योगिनी। कामाख्या=स्त्री शक्ति तीर्थ। 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते'=देवता वास।

#शक्ति#उपासना#स्त्री
साधक की भूमिका

तंत्र साधना में साधक की क्या भूमिका होती है?

साधक की भूमिका: कुलार्णव — तीन भाव: पशु (प्रारंभिक), वीर (मध्यम), दिव्य (उन्नत)। छह गुण: श्रद्धा, नित्यता, गोपनीयता, निर्भयता, शुद्ध उद्देश्य, समर्पण। तंत्रालोक: 'साधकः शिवः' — साधक स्वयं शिव है।

#साधक#भूमिका#पात्रता
तंत्र में ध्यान

तंत्र साधना में ध्यान की क्या भूमिका है?

तंत्र में ध्यान की भूमिका: शक्ति का केंद्रीकरण। देवता का आवाहन (स्वरूप स्पष्ट = उपस्थित)। चक्र-नाड़ी पर ऊर्जा प्रवाह। अहंकार विसर्जन (विज्ञान भैरव: 'मैं-वह का भेद मिटना = मोक्ष')। सिद्धि प्रमाणिकता। दिव्य आभामंडल से रक्षा।

#ध्यान#भूमिका#शक्ति
तंत्र और मंत्र

तंत्र साधना में मंत्र की क्या भूमिका है?

तंत्र में मंत्र: 'मंत्रो हि देवता स्वयम्।' पाँच भूमिकाएं: आवाहन, चक्र जागरण, बाधा निवारण (कवच), मंत्र सिद्धि (पुरश्चरण), ब्रह्म से एकता। 'मंत्रः सर्वस्य साधकः।'

#मंत्र#भूमिका#बीज मंत्र
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