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तंत्र में ध्यान📜 तंत्रालोक, विज्ञान भैरव तंत्र, कुलार्णव तंत्र2 मिनट पठन

तंत्र साधना में ध्यान की क्या भूमिका है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र में ध्यान की भूमिका: शक्ति का केंद्रीकरण। देवता का आवाहन (स्वरूप स्पष्ट = उपस्थित)। चक्र-नाड़ी पर ऊर्जा प्रवाह। अहंकार विसर्जन (विज्ञान भैरव: 'मैं-वह का भेद मिटना = मोक्ष')। सिद्धि प्रमाणिकता। दिव्य आभामंडल से रक्षा।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र में ध्यान की भूमिका तंत्रालोक और विज्ञान भैरव तंत्र में विस्तार से वर्णित है:

तंत्रालोक

ध्यानं त्रिकस्य साधनम्।' — ध्यान त्रिक (शिव, शक्ति, नर) का साधन है।

तंत्र में ध्यान की छह भूमिकाएं

1शक्ति का केंद्रीकरण

मंत्र शक्ति उत्पन्न करता है — ध्यान उसे एक बिंदु पर केंद्रित करता है। बिना ध्यान के शक्ति बिखरती है।

2देवता का आवाहन

ध्यान = देवता के स्वरूप को मन में जीवंत करना। जब स्वरूप स्पष्ट — देवता उपस्थित।

3नाड़ी और चक्र पर ध्यान

तंत्र में विशेष नाड़ी और चक्र पर ध्यान — ऊर्जा को उस स्थान पर प्रवाहित करता है।

4अहंकार विसर्जन

विज्ञान भैरव: गहरे ध्यान में 'मैं' और 'वह' का भेद मिट जाता है। यही मोक्ष।

5सिद्धि की प्रमाणिकता

तंत्र में सिद्धि = ध्यान में अनुभव। देव दर्शन, नाद श्रवण — ध्यान में होते हैं।

6दैनिक सुरक्षा

ध्यान से साधक के चारों ओर दिव्य आभामंडल बनता है — नकारात्मक शक्तियों से रक्षा।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक, विज्ञान भैरव तंत्र, कुलार्णव तंत्र
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