विस्तृत उत्तर
तंत्र में ध्यान की भूमिका तंत्रालोक और विज्ञान भैरव तंत्र में विस्तार से वर्णित है:
तंत्रालोक
ध्यानं त्रिकस्य साधनम्।' — ध्यान त्रिक (शिव, शक्ति, नर) का साधन है।
तंत्र में ध्यान की छह भूमिकाएं
1शक्ति का केंद्रीकरण
मंत्र शक्ति उत्पन्न करता है — ध्यान उसे एक बिंदु पर केंद्रित करता है। बिना ध्यान के शक्ति बिखरती है।
2देवता का आवाहन
ध्यान = देवता के स्वरूप को मन में जीवंत करना। जब स्वरूप स्पष्ट — देवता उपस्थित।
3नाड़ी और चक्र पर ध्यान
तंत्र में विशेष नाड़ी और चक्र पर ध्यान — ऊर्जा को उस स्थान पर प्रवाहित करता है।
4अहंकार विसर्जन
विज्ञान भैरव: गहरे ध्यान में 'मैं' और 'वह' का भेद मिट जाता है। यही मोक्ष।
5सिद्धि की प्रमाणिकता
तंत्र में सिद्धि = ध्यान में अनुभव। देव दर्शन, नाद श्रवण — ध्यान में होते हैं।
6दैनिक सुरक्षा
ध्यान से साधक के चारों ओर दिव्य आभामंडल बनता है — नकारात्मक शक्तियों से रक्षा।





