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भूमिका — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3 प्रश्न

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साधक की भूमिका

तंत्र साधना में साधक की क्या भूमिका होती है?

साधक की भूमिका: कुलार्णव — तीन भाव: पशु (प्रारंभिक), वीर (मध्यम), दिव्य (उन्नत)। छह गुण: श्रद्धा, नित्यता, गोपनीयता, निर्भयता, शुद्ध उद्देश्य, समर्पण। तंत्रालोक: 'साधकः शिवः' — साधक स्वयं शिव है।

साधकभूमिकापात्रता
तंत्र में ध्यान

तंत्र साधना में ध्यान की क्या भूमिका है?

तंत्र में ध्यान की भूमिका: शक्ति का केंद्रीकरण। देवता का आवाहन (स्वरूप स्पष्ट = उपस्थित)। चक्र-नाड़ी पर ऊर्जा प्रवाह। अहंकार विसर्जन (विज्ञान भैरव: 'मैं-वह का भेद मिटना = मोक्ष')। सिद्धि प्रमाणिकता। दिव्य आभामंडल से रक्षा।

ध्यानभूमिकाशक्ति
तंत्र और मंत्र

तंत्र साधना में मंत्र की क्या भूमिका है?

तंत्र में मंत्र: 'मंत्रो हि देवता स्वयम्।' पाँच भूमिकाएं: आवाहन, चक्र जागरण, बाधा निवारण (कवच), मंत्र सिद्धि (पुरश्चरण), ब्रह्म से एकता। 'मंत्रः सर्वस्य साधकः।'

मंत्रभूमिकाबीज मंत्र

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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