कर्म सिद्धांत84 लाख योनियां क्या हैं और मनुष्य कैसे बनता है?पद्म पुराण के अनुसार: जलचर 9L + पेड़-पौधे 20L + कृमि 11L + पक्षी 10L + पशु 30L + मानव 4L = 84 लाख। शुभ कर्मों से मनुष्य जन्म मिलता है। मनुष्य में विवेक और मोक्ष की क्षमता — 'बड़े भाग मानुष तन पावा' (रामचरितमानस)।#84 लाख योनि#पुनर्जन्म#पद्म पुराण
लोकपितर मनुष्य योनि में हों तो श्राद्ध कैसे मिलता है?मनुष्य योनि में श्राद्ध अन्न या भोग रूप में मिलता है।#मनुष्य योनि#श्राद्ध अन्न#भोग
मरणोपरांत आत्मा यात्राश्राद्ध अन्न मनुष्य योनि में क्या बनता है?मनुष्य योनि में श्राद्ध अन्न अन्न के रूप में प्राप्त होता है।#श्राद्ध अन्न#मनुष्य योनि#अन्न
जीवन एवं मृत्युकेवल मनुष्य को ही कर्मफल क्यों भोगना पड़ता है?मनुष्य 'कर्म योनि' में है — उसे विवेक और स्वतंत्र इच्छा से नए कर्म करने की शक्ति मिली है। इसीलिए वह अपने कर्मों का पूरा उत्तरदायी है और उसे उनका फल भोगना पड़ता है।#कर्मफल#मनुष्य योनि#विवेक