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मुंडन से जुड़े सभी प्रश्न(4)

मुंडन पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

तीर्थ एवं धाम

तिरुपति बालाजी में बाल क्यों चढ़ाते हैं?

तिरुपति में बाल इसलिए चढ़ाते हैं क्योंकि एक बार भगवान वेंकटेश्वर के सिर पर चोट लगी और बाल झड़ गए। तब उनकी माता नीला देवी ने अपने बाल काटकर भगवान को दिए — उनकी चोट ठीक हो गई। तब से जो भक्त बाल दान करे, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।

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संस्कार विधि

मुंडन संस्कार में बालों को कहां विसर्जित करें?

बाल विसर्जन: पवित्र नदी (सर्वोत्तम — गंगा), तीर्थ (काशी/प्रयाग/हरिद्वार), समुद्र, सरोवर। नदी दूर हो=पीपल/बरगद जड़ में गाड़ें। कूड़ा/नाली = अशुभ। विधि: कपड़े में लपेट→'ॐ'→नदी। आयु: 1/3/5 वर्ष।

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मंदिर संस्कार

मंदिर में मुंडन संस्कार कराने का क्या नियम है?

मुंडन = 16 संस्कारों में से एक — गर्भ-बाल (अशुद्ध) हटाना। समय: 1-3 वर्ष, विषम वर्ष, शुक्ल पक्ष। मंदिर: तिरुपति (सर्वाधिक प्रसिद्ध), वाराणसी, हरिद्वार। विधि: मुहूर्त → संकल्प → गणपति पूजन → मुंडन → बाल नदी/देवता अर्पित → स्नान → दर्शन। लाभ: दोष निवारण, बुद्धि वृद्धि।

#मुंडन#चूड़ाकर्म#बाल कटाई
प्रसिद्ध मंदिर

तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान की परंपरा का क्या अर्थ है?

बाल दान अर्थ: अहंकार त्याग + कर्म-बंधन मुक्ति + नया जीवन। पौराणिक कथा: ग्वालिन ने भगवान के सिर पर बाल लगाए — भगवान ने वरदान दिया। 600+ नाई, प्रतिदिन 50,000+ श्रद्धालु। अर्पित बाल विग उद्योग में — TTD की आय। पूर्णतः स्वैच्छिक — अनिवार्य नहीं।

#तिरुपति#मुंडन#बाल दान
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