विस्तृत उत्तर
मुंडन (चूड़ाकर्म/चूड़ाकरण) हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है। मंदिर में मुंडन कराना विशेष शुभ माना जाता है।
मुंडन संस्कार क्या है
शिशु के जन्म के बाद पहली बार बालों की कटाई = मुंडन। जन्म के बाल 'गर्भ-बाल' कहलाते हैं जिन्हें अशुद्ध माना जाता है। इन्हें हटाकर नवीन बाल उगाना = शुद्धि + नई शुरुआत।
मुंडन का शुभ समय
- ▸1 वर्ष — न्यूनतम (कुछ परम्पराओं में)
- ▸1-3 वर्ष — सर्वाधिक प्रचलित
- ▸विषम वर्ष (1, 3, 5, 7) — शुभ
- ▸शुक्ल पक्ष — शुभ
- ▸सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार — शुभ दिन
- ▸मांगलिक/कुंडली दोष — ज्योतिषी से मुहूर्त
मंदिर में मुंडन — विशेष महत्व
- ▸देवता की उपस्थिति में संस्कार = दैवीय आशीर्वाद
- ▸प्रसिद्ध मंदिर: तिरुपति (सर्वाधिक प्रसिद्ध), वाराणसी (विश्वनाथ), गया, उज्जैन, हरिद्वार
- ▸तिरुपति: 'कल्याणकट्टा' — विश्व का सबसे बड़ा मुंडन स्थल
विधि
- 1शुभ मुहूर्त निर्धारण (ज्योतिषी/पंचांग से)
- 2शिशु को स्नान कराएँ, शुद्ध वस्त्र पहनाएँ
- 3देवता के सामने संकल्प (माता-पिता)
- 4हल्दी-चंदन लगाकर पूजा
- 5गणपति पूजन
- 6नाई (क्षौरकर्म) — पहले गुरु/पिता/मामा एक कैंची चलाएँ (प्रतीकात्मक)
- 7फिर पूर्ण मुंडन
- 8बाल — पवित्र नदी में/देवता को अर्पित
- 9शिशु को पुनः स्नान
- 10देवता के दर्शन + आशीर्वाद
- 11ब्राह्मण भोजन/दक्षिणा
- 12परिवार में भोज
शास्त्रीय लाभ
- ▸गर्भकालीन दोष निवारण
- ▸शिशु की बुद्धि वृद्धि
- ▸स्वास्थ्य लाभ — नवीन बाल मजबूत
- ▸पितृ-ऋण मुक्ति (कुछ परम्पराओं में)
सावधानी
- ▸अनुभवी नाई — शिशु की त्वचा कोमल
- ▸स्वच्छता — संक्रमण से बचाव
- ▸शिशु को शांत रखने का प्रयास — खिलौना/मिठाई





