लोकभगवान के विराट स्वरूप में भुवर्लोक कहाँ स्थित है?भगवान के विराट स्वरूप में भुवर्लोक नाभि-स्थान पर है। पाताल से भूलोक चरणों में है, भुवर्लोक नाभि में है और स्वर्लोक वक्षस्थल-सिर में।#विराट स्वरूप#भुवर्लोक#नाभि
दिव्यास्त्रवृत्रासुर का जन्म कैसे हुआ?इंद्र द्वारा विश्वरूप के वध के बाद उनके पिता त्वष्टा ने प्रतिशोध के लिए महायज्ञ किया। उस यज्ञ की अग्नि से वृत्रासुर का जन्म हुआ।#वृत्रासुर#जन्म#त्वष्टा
लोकसामान्य आँखों से विश्वरूप क्यों नहीं दिखता?क्योंकि विश्वरूप भौतिक दृष्टि से परे है।#विश्वरूप#दृष्टि#कृष्ण
लोकअर्जुन को दिव्य चक्षु क्यों मिला?क्योंकि विश्वरूप सामान्य आँखों से देखा नहीं जा सकता।#अर्जुन#दिव्य चक्षु#विश्वरूप
हिंदू दर्शनगीता विराट रूप दर्शन का महत्व क्या हैगीता 11: अर्जुन ने कृष्ण का विश्वरूप देखा — समस्त सृष्टि, काल, देवता एक शरीर में। कृष्ण: 'कालोऽस्मि' (11.32)। महत्व: ईश्वर सर्वव्यापी प्रमाणित, अर्जुन का संदेह/अहंकार मिटा, दिव्य दृष्टि = ईश्वर कृपा। अंत में सगुण रूप = भक्ति सरल।#विराट रूप#विश्वरूप#गीता अध्याय 11