विस्तृत उत्तर
भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य चक्षु इसलिए दिया क्योंकि सामान्य नेत्र विश्वरूप को सहन या देख नहीं सकते। दिव्य दृष्टि से ही वह विराट सत्य दिखाई देता है।
अर्जुन को दिव्य चक्षु क्यों मिला को संदर्भ सहित समझें
अर्जुन को दिव्य चक्षु क्यों मिला का सबसे सीधा सार यह है: क्योंकि विश्वरूप सामान्य आँखों से देखा नहीं जा सकता।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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ब्रह्मास्त्र किन किन के पास था महाभारत में?
महाभारत में ब्रह्मास्त्र द्रोणाचार्य, अर्जुन, अश्वत्थामा, भीष्म, कर्ण, श्रीकृष्ण के पास था। रामायण में राम, लक्ष्मण, मेघनाद, परशुराम के पास था। यह दुर्लभ अस्त्र था जो केवल विशेष शिक्षा से मिलता था।
अर्जुन ने कर्ण के वरुणास्त्र का सामना कैसे किया?
कर्ण के वरुणास्त्र से आकाश काले बादलों से भर गया और अंधकार छा गया। अर्जुन ने वायव्यास्त्र चलाया जिसने बादलों को उड़ा दिया और अंधकार समाप्त हो गया।
अर्जुन ने संशप्तकों के विरुद्ध वायव्यास्त्र क्यों चलाया?
संशप्तकों ने अर्जुन को चारों ओर से घेरकर इतनी बाण वर्षा की कि कृष्ण भी अर्जुन को देख नहीं पा रहे थे। इस संकट से निकलने के लिए अर्जुन ने वायव्यास्त्र चलाया।
अर्जुन को वायव्यास्त्र कैसे मिला?
अर्जुन को वायव्यास्त्र दो स्रोतों से मिला — गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा के रूप में, और वनवास काल में देवलोक जाकर पवन देव से सीधी दीक्षा के रूप में।
वायव्यास्त्र ने संशप्तकों के साथ युद्ध में क्या किया?
संशप्तकों ने अर्जुन को घेरकर बाण वर्षा की तो अर्जुन ने वायव्यास्त्र चलाया। प्रचंड वायु ने बाण वर्षा रोक दी और शत्रु के घोड़े-रथ-योद्धा सूखे पत्तों की तरह उड़ गए।
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