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विस्तृत उत्तर
वृत्रासुर का जन्म त्वष्टा प्रजापति के प्रतिशोध से हुआ। इंद्र ने त्वष्टा के पुत्र विश्वरूप का वध किया था। अपने पुत्र की मृत्यु से दुखी होकर त्वष्टा ने इंद्र से प्रतिशोध लेने के लिए एक महायज्ञ किया। उस यज्ञ की अग्नि से एक विशालकाय और भयानक असुर का जन्म हुआ जिसका नाम वृत्र रखा गया। वृत्र ने जल्द ही अपनी अपार शक्ति से देवों को पराजित कर दिया और स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।
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