लोकराक्षस वैदिक यज्ञों से घृणा क्यों करते हैं?राक्षस तामसिक और धर्म-विरोधी होते हैं; वे वैदिक यज्ञ, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों को नष्ट करना चाहते हैं।#राक्षस#वैदिक यज्ञ#धर्म विरोध
वेद एवं यज्ञअतिरात्र यज्ञ का क्या विधान हैअतिरात्र = रात भर चलने वाला सोमयाग (7 प्रकारों में छठवाँ)। विशेषता: चौथा सवन (रात्रि), अश्विनीकुमार ग्रह (भोर में)। 16 ऋत्विज्। 1975 और 2011 में केरल में सम्पन्न — Frits Staal द्वारा documented। आज अत्यन्त दुर्लभ — केवल केरल नम्बूदिरी परम्परा में जीवित।#अतिरात्र#सोमयाग
हवन एवं यज्ञसोमयाग क्या है और कैसे किया जाता हैसोमयाग = सोमरस से आहुति वाला श्रेष्ठ वैदिक यज्ञ। 7 प्रकार: अग्निष्टोम सबसे मूल। 16 ऋत्विज्, वसन्त ऋतु में। क्रम: दीक्षा → सोम क्रय → सोमरस निष्कासन (तीन सवन) → सामगान → आहुति → सोमपान → दक्षिणा → अवभृथ स्नान। राजसूय, अश्वमेध भी सोमयाग श्रेणी। आज अत्यन्त दुर्लभ।#सोमयाग#अग्निष्टोम#वैदिक यज्ञ