श्रीमद्भागवतभगवान के चरणों की शरण क्यों श्रेष्ठ है?परम शांत मुनि भगवान के चरणों की शरण में रहते हैं; उनके स्पर्श से जीव तुरंत पवित्र होता है, गंगा से पवित्रता समय लेकर मिलती है।#भगवान चरण#शरण#पवित्रता
लोककाव्या माता ने असुरों को देवताओं को क्यों नहीं सौंपा?क्योंकि असुर उनके आश्रम में शरणागत होकर आए थे।#काव्या माता#असुर#शरण
लोकदेवता भगवान शिव की शरण में क्यों गए?त्रिपुरासुरों के अत्याचार से त्रस्त होकर देवता शिव की शरण में गए।#देवता#भगवान शिव#त्रिपुरासुर
भक्ति एवं आध्यात्मजब बहुत दुखी हों तो भगवान को कैसे मनाएँ?दुख में भगवान के सामने सच्चे मन से रोएँ, नाम जपें, शरणागति के भाव से कहें — 'मैं तुम्हारा हूँ'। गीता (18.66) में कृष्ण कहते हैं — केवल मेरी शरण आओ, शोक मत करो। प्रह्लाद, शबरी और कुंती — सभी के दुख में ईश्वर साथ रहे।#दुख#भगवान#भक्ति