विस्तृत उत्तर
काव्या माता ने असुरों को देवताओं को इसलिए नहीं सौंपा क्योंकि उन्होंने उन्हें अभय दे दिया था। असुर उनके आश्रम में शरण लेकर आए थे और शरण देने के बाद उन्हें शत्रुओं के हाथ सौंपना धर्म-विरोधी माना जाता। काव्या माता के लिए यह प्रश्न देव-असुर पक्ष का नहीं, शरणागत धर्म का था। वे जानती थीं कि असुर शुक्राचार्य के शिष्य हैं, लेकिन उससे भी बड़ा तथ्य यह था कि वे भयभीत होकर रक्षा माँग रहे थे। इसलिए उन्होंने इंद्र और देवताओं को रोक दिया और अपने वचन की रक्षा के लिए अपने तपोबल का प्रयोग किया।
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