लोकविष्णु पुराण के 'गायन्ति देवाः' श्लोक का क्या अर्थ है?'गायन्ति देवाः' श्लोक में देवता कहते हैं — भारतवर्ष में जन्म लेने वाले हमसे भी धन्य हैं क्योंकि यह स्वर्ग और मोक्ष दोनों का द्वार है जो हमें भी दुर्लभ है।#गायन्ति देवाः#विष्णु पुराण#भारतवर्ष
लोक'यावद्वायु: प्रवाति यावन्मेघा उपलभ्यन्ते' का क्या अर्थ है?इस श्लोक का अर्थ है — 'जहाँ तक वायु बहती है और जहाँ तक बादल दिखते हैं' — वह क्षेत्र भुवर्लोक (अंतरिक्ष) का निचला और मध्य हिस्सा है।
गुरु तत्व और गुरु कृपा'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः' श्लोक का क्या अर्थ है?'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' का अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं, गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — ऐसे श्रीगुरु को नमन।#गुरुर्ब्रह्मा#ब्रह्मा विष्णु महेश#परब्रह्म
हिंदू दर्शनकर्मण्येवाधिकारस्ते श्लोक का सही अर्थ क्या हैगीता 2.47 — (1) कर्म करना तुम्हारे हाथ में है (2) फल तुम्हारे नियंत्रण में नहीं (3) फल की लालसा कर्म का कारण न बने (4) 'फल नहीं तो कर्म क्यों' — यह सोच भी गलत। सार: पूर्ण समर्पण से कर्म करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ो।#गीता#कर्मण्येवाधिकारस्ते#कर्म