साधु और संतब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और यति साधु कैसे होते हैं?ब्रह्मचारी विद्यासाधना से, गृहस्थ विहित कर्म से, वानप्रस्थ वनतपस्या से और यति योग तथा यतिधर्म से साधु होता है।#ब्रह्मचारी#गृहस्थ#वानप्रस्थ
साधु और संतसाधु किसे कहा जाता है?जो अपने आश्रम के धर्म का साधन करता है, वह साधु कहा गया है।#साधु#ब्रह्मचारी#गृहस्थ
श्रीमद्भागवतसाधारण भाषा में भगवान का नाम हो तो क्या वह पवित्र होती है?हाँ। नारदजी कहते हैं कि दोषयुक्त वाणी भी यदि भगवान के नाम और यश से युक्त हो तो साधु उसे सुनते और गाते हैं।#भगवान का नाम#भाषा#हरि यश
श्रीमद्भागवतसत्संग क्यों जरूरी है?नारदजी के अनुसार संत-दर्शन पाप नष्ट करता है, संसार-दुख शांत करता है और विवेक जगाता है।#सत्संग#साधु#विवेक