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साष्टांग प्रणाम से जुड़े सभी प्रश्न(4)

साष्टांग प्रणाम पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा विधि एवं कर्मकांड

दंडवत प्रणाम कैसे करें

दंडवत प्रणाम में कमर से झुककर पेट के बल लेटें जिससे ठोड़ी, छाती, दोनों हाथ, दोनों घुटने और पाँव जमीन से स्पर्श करें। पेट जमीन से न लगे। इस मुद्रा में भगवान को समर्पण भाव से प्रणाम करें।

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सूर्य अर्घ्य

अर्घ्य के बाद प्रदक्षिणा और प्रणाम कैसे करते हैं?

अर्घ्य के बाद: अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें। फिर सूर्य देव को साष्टांग (8 अंगों से) या पंचांग (5 अंगों से) प्रणाम करें।

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षोडशोपचार पूजा

षोडशोपचार पूजा में प्रदक्षिणा क्या होती है?

षोडशोपचार में प्रदक्षिणा/नमस्कार = परिक्रमा करना और साष्टांग प्रणाम कर क्षमा मांगना — यह पूजा का सोलहवाँ और अंतिम उपचार है।

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मंदिर नियम

मंदिर में साष्टांग प्रणाम कैसे करें और कब करें?

साष्टांग = 8 अंग भूमि पर: दोनों पैर, घुटने, हथेलियाँ, छाती, मस्तक। विधि: खड़े → घुटने → हथेलियाँ → छाती+मस्तक → सम्पूर्ण शरीर। स्त्रियाँ: पंचांग (5 अंग) कुछ परम्पराओं में। कब: देवता/गुरु के सामने, तीर्थ, विशेष पूजा। भीड़ में सावधान। वृद्ध/गर्भवती: मानसिक प्रणाम।

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