भक्ति एवं आध्यात्मक्या भगवान सच में हैं इसका प्रमाणन्याय-दर्शन में तर्क है — सुव्यवस्थित विश्व का एक कारण (ईश्वर) होना चाहिए। वेदांत कहता है — ईश्वर बाहर नहीं, सब में व्याप्त है। व्यक्तिगत अनुभव और भक्ति स्वयं एक प्रमाण है। यह प्रश्न हिंदू दर्शन में खुला और जिज्ञासापूर्ण रहा है।#ईश्वर का प्रमाण#भगवान हैं#आस्था और तर्क
भक्ति एवं आध्यात्मकर्म और भाग्य में कौन बड़ा हैकर्म बड़ा है क्योंकि भाग्य स्वयं कर्म का फल है। पूर्व के कर्म ही वर्तमान का भाग्य बनते हैं और वर्तमान के कर्म ही भविष्य का भाग्य बनाते हैं। महाभारत में भी कहा है कि कर्म के बिना भाग्य टिक नहीं सकता।
कर्म सिद्धांतकर्म का सिद्धांत क्या है हिंदू धर्म के अनुसार?कर्म सिद्धांत: प्रत्येक क्रिया का फल मिलता है। गीता में कर्मयोग — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'। निष्काम कर्म मोक्ष का मार्ग, राग-द्वेष युक्त कर्म बंधनकारी। यह पुरुषार्थ का सिद्धांत है, भाग्यवाद नहीं।#कर्म#कर्म सिद्धांत#हिंदू दर्शन