लोकभगवान विष्णु के शत्रु कौन-कौन थे?जय-विजय के जन्म हिरण्याक्ष, हिरण्यकशिपु, रावण, कुम्भकर्ण, शिशुपाल और दन्तवक्र थे।#विष्णु शत्रु#जय विजय#अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — इसका क्या अर्थ है?अर्थ — जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। चार कारण — धर्म हानि, असुरों का बढ़ना, अन्याय, और ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी का कष्ट। यह गीता के 'यदा यदा हि धर्मस्य' के समान सिद्धान्त है।#बालकाण्ड#धर्म हानि#अवतार
हिंदू दर्शनदशावतार कथा में विकासवाद का क्या संबंधदशावतार क्रम: मत्स्य (जल) → कूर्म (उभयचर) → वराह (भूमि) → नरसिंह (संक्रमण) → वामन (आदि मानव) → परशुराम → राम → कृष्ण → बुद्ध → कल्कि — डार्विन विकासवाद से आश्चर्यजनक समानता। रोचक तुलना, परंतु पुराणों का उद्देश्य विकासवाद नहीं बल्कि धर्म रक्षा था।#दशावतार#विकासवाद#डार्विन
हिंदू दर्शनयदा यदा हि धर्मस्य श्लोक का अर्थ क्या हैगीता 4.7-8 — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते हैं — सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म स्थापना के लिए — प्रत्येक युग में। यह अवतारवाद का मूल सिद्धांत और शाश्वत आश्वासन है।#गीता#श्लोक#अवतार
भगवद गीतागीता के चौथे अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग का सारचौथा अध्याय: अवतार सिद्धांत, कर्म-अकर्म-विकर्म का रहस्य, ज्ञान की सर्वोच्च महिमा और यज्ञों के विभिन्न प्रकार। ज्ञान अग्नि के समान सभी पापों को जलाता है।#गीता#ज्ञानकर्मसंन्यासयोग#चौथा अध्याय
शिव रूपशिव के रुद्र रूप के ग्यारह अवतारों के नाम क्या हैं?शिव पुराण (शतरुद्र संहिता 18.27): कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शम्भू, चण्ड, भव। भागवत: मन्यु, मनु, महिनस, महान्, शिव, ऋतध्वज, उग्ररेता, भव, काल, वामदेव, धृतव्रत। सुरभी पुत्र — देवकार्य हेतु।#एकादश रुद्र#ग्यारह#अवतार