गृहप्रवेश नियमघर की नींव रखने का शुभ मुहूर्त कैसे निकालें?शुभ तिथि (शुक्ल पक्ष), शुभ नक्षत्र (रोहिणी, पुष्य, श्रवण आदि), शुभ वार (सोम/बुध/गुरु/शुक्र) और शुभ लग्न देखकर मुहूर्त निकालें। योग्य ज्योतिषी से गृहस्वामी की कुंडली अनुसार मुहूर्त निकलवाना सर्वोत्तम है।#नींव मुहूर्त#भूमि पूजन#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्तमाँ छिन्नमस्ता की जयंती कब होती है?माँ छिन्नमस्ता जयंती: वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी तिथि। यह साधना के लिए विशेष शुभ तिथि है।#छिन्नमस्ता जयंती#वैशाख शुक्ल चतुर्दशी#साधना तिथि
शुभ मुहूर्तमाँ धूमावती की जयंती कब मनाई जाती है?माँ धूमावती जयंती: ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि। यह साधना के लिए अत्यंत शुभ तिथि है।#धूमावती जयंती#ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी#साधना तिथि
रुद्राभिषेक का सही समयरुद्राभिषेक का सबसे अच्छा समय कौन सा है?रुद्राभिषेक का सबसे अच्छा समय प्रदोष काल (सूर्यास्त से डेढ़ घंटा पहले से डेढ़ घंटा बाद) है — इस समय शिव तांडव करते हैं और सकाम कामनाओं की पूर्ति की संभावना अधिकतम होती है।#रुद्राभिषेक समय#प्रदोष काल#शुभ मुहूर्त
व्रत नियम और संकल्पबुधवार का व्रत कब से शुरू करें?बुधवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष (उजले पखवाड़े) के पहले बुधवार से शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है।#व्रत आरंभ#शुक्ल पक्ष#शुभ मुहूर्त
व्रत नियम और संकल्पमंगलवार का व्रत कब से शुरू करना चाहिए?मंगलवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करना चाहिए। अगर सूर्य उत्तरायण में हो या ज्येष्ठ मास का 'बड़ा मंगल' हो, तो यह और भी उत्तम माना जाता है।#व्रत प्रारंभ#शुभ मुहूर्त#ज्येष्ठ मास
मुहूर्तशुभ मुहूर्त कैसे निकालें किसी भी काम के लिएसरल: अभिजित मुहूर्त (दोपहर ~11:36-12:24, बुधवार छोड़कर)। पंचांग: शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। राहु काल टालें। महत्वपूर्ण कार्य: ज्योतिषी अनिवार्य। ऑनलाइन:।#शुभ मुहूर्त#विधि#पंचांग
मुहूर्त एवं योगअमृत सिद्धि योग में पूजा का क्या विधान हैअमृत सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र (जैसे गुरुवार+पुष्य, शनिवार+रोहिणी)। कर्म = अमृत (शाश्वत) फल। मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, दीक्षा, गृह प्रवेश सर्वोत्तम। दान = अक्षय। सर्वार्थ सिद्धि से भिन्न — वह 'सिद्धि', यह 'अमृत (शाश्वत) फल'।#अमृत सिद्धि#योग#शुभ मुहूर्त
मुहूर्त एवं योगसर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करने से क्या लाभ मिलता हैसर्वार्थ सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र संयोग = सभी कार्य सिद्ध। पूजा = कई गुना फल, मंत्र सिद्धि, मनोकामना पूर्ति। गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार, खरीद — सभी शुभ। अन्य दोषों को भी क्षीण करता है। पंचांग में तिथि देखें।#सर्वार्थ सिद्धि#योग#शुभ मुहूर्त
साधना प्रारंभकाली साधना कब शुरू करनी चाहिए?काली साधना आरंभ के शुभ काल: शारद नवरात्रि (सर्वोत्तम), दीपावली की रात (महाकाल), अमावस्या, कालाष्टमी। वार: शनिवार या मंगलवार। भक्ति मार्ग किसी भी शुक्ल पक्ष के शुभ दिन शुरू करें — श्रद्धा और संकल्प पर्याप्त है।#काली साधना आरंभ#शुभ मुहूर्त#अमावस्या