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क्या है

सूर्य क्या है?(9)

सूर्य का अर्थसूर्य क्या है?सूर्य का महत्व
सरल उत्तर

सूर्य सप्तमी श्राद्ध को तेज, यश और ऊर्जा से जोड़ते हैं।

स्रोत प्रश्न: सप्तमी श्राद्ध में सूर्य का महत्व क्या है? →
लोक

स्वर्लोक की ऊपरी और निचली सीमा क्या है?

स्वर्लोक की निचली सीमा सूर्यमंडल के ऊपर से और ऊपरी सीमा ध्रुवलोक तक है। सूर्य के नीचे भुवर्लोक है और ध्रुव के ऊपर महर्लोक है।

#स्वर्लोक#सीमा#सूर्य
लोक

सप्तमी श्राद्ध में सूर्य का महत्व क्या है?

सूर्य सप्तमी श्राद्ध को तेज, यश और ऊर्जा से जोड़ते हैं।

#सप्तमी श्राद्ध#सूर्य#तेज यश
लोक

सप्तमी तिथि के देवता कौन हैं?

सप्तमी तिथि के अधिष्ठाता देव सूर्य माने गए हैं।

#सप्तमी देवता#सूर्य#भास्कर
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

१२ मुखी रुद्राक्ष का मंत्र और देवता कौन हैं?

१२ मुखी रुद्राक्ष द्वादश आदित्य स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः' है और यह सूर्य जैसा तेज देता है।

#12 मुखी#आदित्य#सूर्य
पंचांग एवं ज्योतिष

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र क्या होता है?

उत्तराषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 21वाँ। धनु 26°40'–मकर 10°। स्वामी सूर्य, देवता विश्वदेव। प्रतीक हाथी-दाँत। दीर्घकालीन और अटल कार्यों के लिए शुभ। जन्म में दृढ़, सिद्धांतवादी, सच्चे नेता।

#उत्तराषाढ़ा नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र क्या होता है?

उत्तराफाल्गुनी 27 नक्षत्रों में द्वादश। सिंह 26°40'–कन्या 10°। स्वामी सूर्य, देवता अर्यमन। प्रतीक शय्या के दो पाये। विवाह-साझेदारी के लिए शुभ। जन्म में सेवाभावी, कर्तव्यनिष्ठ, न्यायप्रिय।

#उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

कृत्तिका नक्षत्र क्या होता है?

कृत्तिका 27 नक्षत्रों में तृतीय। मेष 26°40'–वृषभ 10°। स्वामी सूर्य, देवता अग्नि। प्रतीक अग्नि-लौ। सैन्य-अग्नि कार्यों के लिए अनुकूल। जन्म में तेजस्वी, ऊर्जावान, न्यायी।

#कृत्तिका नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं कैलेंडर

खरमास क्या है इसमें कौन से काम वर्जित

खरमास = सूर्य धनु/मीन राशि (~दिसंबर-जनवरी + मार्च-अप्रैल)। गुरु कमजोर → शुभ कार्य वर्जित (विवाह/गृह प्रवेश)। पूजा/दान/दैनिक = अनुमत। अधिक मास से भिन्न।

#खरमास#मलमास#वर्जित
त्योहार पूजा

मकर संक्रांति पर दान करने का शास्त्रीय विधान क्या है?

मकर संक्रांति दान: पुण्यकाल (संक्रांति ±6.5 घण्टे) में। क्रम: तिल स्नान → सूर्य अर्घ्य → दान। सामग्री: तिल (सर्वोत्तम), गुड़, खिचड़ी, गर्म वस्त्र, अन्न, गोदान। पितर तर्पण। गंगा स्नान-दान विशेष। भीष्म = उत्तरायण महत्व। दान अक्षय फल।

#मकर संक्रांति दान#तिल दान#उत्तरायण दान
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