विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक की निचली सीमा सूर्य मंडल के ठीक ऊपर से प्रारंभ होती है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार पृथ्वी से सूर्य की दूरी एक लाख योजन है और सूर्य के ऊपर से स्वर्लोक का आरंभ होता है। इससे पहले का क्षेत्र भुवर्लोक (अंतरिक्ष) है जहाँ तक वायु बहती है और बादल तैरते हैं। स्वर्लोक की ऊपरी सीमा ध्रुवलोक है जो सप्तर्षि मंडल से भी 13 लाख योजन ऊपर स्थित है। ध्रुवलोक स्वर्लोक की सर्वोच्च खगोलीय सीमा को स्पर्श करता है। ध्रुवलोक के ऊपर महर्लोक प्रारंभ होता है जो ध्रुवलोक से 1 करोड़ योजन ऊपर है। सूर्य से ध्रुवलोक तक की यह विशाल दूरी ही वह क्षेत्र है जहाँ स्वर्ग के विभिन्न उप-लोक, देव-विमान और ज्योतिर्मय नक्षत्र निवास करते हैं।
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