विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड की इस ऊर्ध्वाधर संरचना को समझने के लिए ध्रुवलोक (Pole Star) को एक केंद्रीय मापदंड माना गया है। ध्रुवलोक भगवान की इच्छा से स्थापित ब्रह्माण्ड का वह अचल और महान धुरी-बिन्दु (Pivot) है जिसके चारों ओर शिशुमार चक्र और समस्त ग्रह-नक्षत्र वायु के द्वारा प्रेरित होकर निरंतर परिक्रमा करते हैं। चूंकि ध्रुवलोक अचल है और समस्त ब्रह्माण्ड इसके चारों ओर परिक्रमा करता है इसीलिए यह सभी लोकों की दूरियाँ मापने का सबसे विश्वसनीय और अचल केंद्र बिंदु है। महर्लोक की स्थिति ध्रुवलोक के सापेक्ष मापी जाती है — यह ध्रुवलोक से एक करोड़ योजन ऊपर है। श्रीमद्भागवत पुराण के पञ्चम स्कन्ध (५.२३.९) और विष्णु पुराण के द्वितीय अंश में इस खगोलीय माप का प्रामाणिक वर्णन मिलता है।
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