पौराणिक ज्ञानअकाल मृत्यु होने पर आत्मा को क्या होता है?गरुड़ पुराण: अकाल मृत्यु = प्रेत योनि (शेष आयु तक भटकना), अधूरी इच्छाएँ। मुक्ति: चतुर्दशी श्राद्ध, नारायण बलि, गया पिंडदान, गरुड़ पुराण पाठ।#अकाल मृत्यु#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण
लोकघात चतुर्दशी क्या है?अकाल मृत्यु वालों के श्राद्ध की चतुर्दशी घात चतुर्दशी है।#घात चतुर्दशी#अकाल मृत्यु#श्राद्ध
लोकशस्त्राघात चतुर्दशी क्या है?अकाल या शस्त्राघात मृत्यु वालों के श्राद्ध की चतुर्दशी को शस्त्राघात चतुर्दशी कहते हैं।#शस्त्राघात चतुर्दशी#अकाल मृत्यु#घटचतुर्दशी
विशेष मृत्यु श्राद्धघट चतुर्दशी क्या है?घट चतुर्दशी = पितृ पक्ष की वह विशेष चतुर्दशी तिथि जब अकाल मृत्यु (विष, दुर्घटना, युद्ध, पशु आक्रमण, आत्महत्या) से मरे व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है। इसे 'घायल चतुर्दशी' भी कहते हैं। यह कठोर और अलङ्घ्य नियम है।#घट चतुर्दशी#घायल चतुर्दशी#अकाल मृत्यु
लोकप्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।#प्रेत बनने का कारण#पिण्डदान#अकाल मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रानारायण बलि क्या है?नारायण बलि अकाल मृत्यु प्राप्त आत्मा को प्रेत योनि और मृत्यु-बाधाओं से मुक्त करने वाला अनुष्ठान है।#नारायण बलि#अकाल मृत्यु#प्रेत योनि
शिव वास गणनाशिव वास शेषफल 7 हो तो क्या होता है?शेषफल 7 या 0 = शिव श्मशान में। इस दिन सकाम रुद्राभिषेक = मृत्युतुल्य कष्ट और अकाल मृत्यु का भय। निष्काम भक्ति, श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि में यह नियम लागू नहीं।#शेषफल 7#श्मशान#अकाल मृत्यु
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है?तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।#शंकुकर्णेश्वर#महामृत्युंजय#अनुष्ठान
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव वायव्य कोण में क्यों स्थित हैं — इसका आध्यात्मिक कारण क्या है?वायव्य कोण के अधिपति वायु देव हैं — वायु प्राण का प्रतीक। प्राण-दिशा में स्थापित होने से यह शिवलिंग प्राणों की रक्षा, आयु-वृद्धि, असाध्य रोग नाश और अकाल मृत्यु रोकने में अमोघ है।#शंकुकर्णेश्वर#वायव्य कोण#वायु