प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।
गरुड़ पुराण: अकाल मृत्यु = प्रेत योनि (शेष आयु तक भटकना)। मुक्ति: विधिवत दाह, चतुर्दशी श्राद्ध, नारायण बलि, गया पिंडदान। विधिवत संस्कार + श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण।