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महत्व

ध्यान का महत्व(4)

ध्यान का अर्थध्यान क्या है?ध्यान का महत्व
सरल उत्तर

उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।

स्रोत प्रश्न: उपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है? →
ध्यान महत्व

पूजा के दौरान ध्यान क्यों जरूरी है?

ध्यान क्यों जरूरी: भागवत — 'बिना भक्ति-ध्यान के पूजा शव जैसी।' ध्यान पूजा का प्राण है — विधि नहीं, रिश्ता बनाता है। उपाय: पूजा से पहले 2 मिनट शांत बैठें, मंत्र बोलते समय अर्थ पर ध्यान दें, मूर्ति को ध्यान से देखें।

#ध्यान#महत्व#एकाग्रता
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है?

उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।

#ध्यान#उपनिषद#माण्डूक्य
वेद ज्ञान

वेदों में ध्यान का महत्व क्या है?

वेदों में 'धी' (ध्यान-बुद्धि) की उपासना केन्द्रीय है। गायत्री मंत्र बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना है। नासदीय सूक्त (10/129) में तप (ध्यान) को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है। वेद-मंत्रों का मनन ही वैदिक ध्यान का मूल रूप है।

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गीता दर्शन

गीता में ध्यान का महत्व क्या है?

गीता अध्याय 6 (ध्यानयोग) के अनुसार नित्य ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है (6/15)। चंचल मन को बार-बार आत्मा में वापस लाना ही ध्यान का अभ्यास है। ध्यान का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

#ध्यान#गीता#अध्याय 6
और महत्व
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