श्राद्ध विधिश्राद्ध में गाय को ग्रास देने का महत्व?गाय = देवमाता (33 कोटि देव निवास)। गरुड़ पुराण: गो-ग्रास = पितर को वैतरणी नदी पार कराना। पंचबलि में गाय = देव भोग। हरा चारा/रोटी+गुड़ दें। गो-दान = सबसे बड़ा दान।#गो ग्रास#श्राद्ध#गाय
लोकअष्टमी श्राद्ध में पशु पक्षियों का महत्व क्या है?वे पंचबलि और पितृ संदेश के वाहक हैं।#पशु पक्षी#पंचबलि#श्राद्ध
श्राद्ध परिचयश्राद्ध कर्म क्यों किया जाता है?तीन ऋणों (देव/ऋषि/पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र मार्ग = श्राद्ध। पितरों को तृप्ति, वंशजों को आयु/संतान/धन/विद्या/मोक्ष का आशीर्वाद। न करने पर पितृ दोष = संतान-हीनता, दरिद्रता, व्याधि।#श्राद्ध#उद्देश्य#पितृ ऋण
लोकपितृ पक्ष कब आता है और इसका महत्व क्या है?भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है, जब पितृलोक पृथ्वी के निकट माना जाता है।#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध
श्राद्ध एवं पितृ कर्मअमावस्या श्राद्ध का विशेष महत्वअमावस्या = पितर सबसे निकट; तर्पण सबसे प्रभावी। तिथि अज्ञात = अमावस्या पर। वर्ष 12 अमावस्या = 12 अवसर। तिल-जल + भोज + दान।#अमावस्या#श्राद्ध#पितर
श्राद्ध एवं पितृ कर्मपितृपक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्वपितृपक्ष अंतिम दिन = सभी पितरों का श्राद्ध। तिथि अज्ञात/अकाल मृत्यु = इसी दिन। 15 दिन न कर पाएं तो कम से कम यही करें। सर्वमान्य, सर्वस्वीकृत। तिल-जल तर्पण + ब्राह्मण/गरीब भोज + दान।#सर्वपितृ अमावस्या#पितृपक्ष#श्राद्ध