भार्गव कवच (फलश्रुति-सौभाग्य)
जपतां कवचं नित्यं सर्वसौभाग्यपूरितम्। इति श्रीविष्णुयामले उपरिभागे जामदग्न्यदिव्याञ्जनसिद्धिकल्पे श्रीभार्गवकवचं सम्पूर्णम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो नित्य इस कवच का जप करते हैं, वे सभी सौभाग्यों से परिपूर्ण हो जाते हैं। इस प्रकार विष्णु यामल तंत्र के अंतर्गत श्री भार्गव कवच संपूर्ण हुआ।
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी प्रकार के सौभाग्य और सिद्धियों की पूर्णता
विस्तृत लाभ
सभी प्रकार के सौभाग्य और सिद्धियों की पूर्णता।
जप काल
कवच के समापन पर फलश्रुति रूप में पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
ॐ भिन्नार्गलाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवतः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ भीमाय नमः