शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ शचीमाङ्गल्यरक्षकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदेवसेनापति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शची (इंद्राणी) के सुहाग (मांगल्य) की रक्षा करने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वैवाहिक जीवन के गंभीर संकटों से रक्षा
विस्तृत लाभ
वैवाहिक जीवन के गंभीर संकटों से रक्षा।
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ॐ ह्रीं बटुकाय मम भूत भविष्यं दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥
जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ में महर्षि कश्यप को दान कर दिया, उन पृथ्वी-पति को नमस्कार। (लाभ: संपत्ति एवं राज्याधिकार की प्राप्ति) 19।
कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥