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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

शुकदेवकृत नृसिंह रक्षा मंत्र

दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयूथपारिः। विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनारायण कवच का अंश
स्वरूपउग्र अट्टहास रूप
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनके अट्टहास से दिशाएं गूंज उठीं और दैत्यों की पत्नियों के गर्भ गिर गए, वे दैत्य-शत्रु भगवान नरसिंह दुर्गम स्थानों और युद्ध में मेरी रक्षा करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

वन, युद्धभूमि, और दुर्गम संकटों में प्राण-रक्षा

02

आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव

विस्तृत लाभ

वन, युद्धभूमि, और दुर्गम संकटों में प्राण-रक्षा। आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव।

जप काल

प्रातः स्नान के पश्चात या दुर्गम यात्रा पर निकलते समय।

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