शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ सूर्यज्योतिषे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपज्योति रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सूर्य और तारों की ज्योति (प्रकाश) के मूल स्रोत हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
चक्षु-रोगों (आँखों की बीमारियों) का निवारण और मुख पर ओज (Aura) की वृद्धि
विस्तृत लाभ
चक्षु-रोगों (आँखों की बीमारियों) का निवारण और मुख पर ओज (Aura) की वृद्धि।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
ॐ कञ्जलोचनाय नमः
ॐ भकाररूपाय नमः
ॐ भुजङ्गभूषणाय नमः
ॐ अजामलवद्धाय नमः।