शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ सर्वकर्तृकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरब्रह्म स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समस्त कार्यों के वास्तविक कर्ता हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
"मैं कर्ता हूँ" इस अहंकार से मुक्ति
02
कर्मों के सुचारू संपादन हेतु
विस्तृत लाभ
"मैं कर्ता हूँ" इस अहंकार से मुक्ति; कर्मों के सुचारू संपादन हेतु।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आस्तेऽद्यापि महेन्द्राद्रौ न्यस्तदण्डः प्रशान्तधीः। उपगीयमानचरितः सिद्धगन्धर्वचारणैः॥
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ रघुपुङ्गवाय नमः
ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्।
ॐ करुणामय्यै नमः