शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
स्वदन्त पाशाङ्कुश रत्नपात्रं करैर्दधानो हरिनीलगात्रः । रक्तांशुको रत्नकिरीटमाली भूत्यै सदा मे द्विमुखो गणेशः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भूत-भविष्य का ज्ञान और समग्र दैवीय सुरक्षा
विस्तृत लाभ
भूत-भविष्य का ज्ञान और समग्र दैवीय सुरक्षा।
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