शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ वाचं वाणी सदा पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपवाणी (सरस्वती स्वरूपा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देवी सरस्वती मेरी वाणी की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: वाणी (Speech) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: वाणी (Speech) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
ॐ वीरघ्नाय नमः
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ देवाय नमः
ॐ महात्मने नमः
ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमः