तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासनामंदिरों में नवग्रहों की स्थापना कैसे होती है?मंदिरों में नवग्रह स्थापना आगम-शास्त्रों के अनुसार होती है — कोई भी दो ग्रह एक-दूसरे के सम्मुख नहीं होते क्योंकि यह उनके विशिष्ट और स्वतंत्र ब्रह्मांडीय प्रभाव का प्रतीक है।#नवग्रह स्थापना#आगम शास्त्र#सम्मुख नहीं
तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासनातंत्र मार्ग में नवग्रहों की उपासना कैसे होती है?तंत्र मार्ग भय नहीं, ब्रह्मांडीय शक्तियों से सामंजस्य का मार्ग है — साधक यंत्र, मंडल और मंत्रों से नवग्रह ऊर्जा को अनुकूल बनाता है। तंत्र में मंत्र देवता का शब्द-स्वरूप (नाद-काय) है।#तंत्र उपासना#यंत्र मंडल मंत्र#ब्रह्मांडीय सामंजस्य