पूजा एवं अनुष्ठानपूजा में दीपक जलाने का आध्यात्मिक अर्थदीपक परब्रह्म का प्रतीक है। तेल अहंकार का, बाती जीवात्मा का और लौ परमात्मा की ज्योति का प्रतीक है। दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और दिव्य तरंगें उत्पन्न होती हैं।#दीपक#आरती#आध्यात्मिक अर्थ
पूजा एवं अनुष्ठानपूजा में मौली बांधने का मंत्र और अर्थमौली बांधने का मंत्र है — 'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।' — अर्थ: जैसे राजा बलि धर्म से बंधे, वैसे ही मैं तुम्हें धर्म से बांधता हूँ।#मौली#कलावा#रक्षासूत्र
पूजा एवं अनुष्ठानपूजा में दीपक बार बार बुझ रहा हो तो क्या अर्थपहले व्यावहारिक कारण जांचें — तेल-घी पर्याप्त है या नहीं, बाती ठीक है या नहीं, पंखा चल रहा है या नहीं। यदि कोई कारण न हो तो भगवान से क्षमा माँगकर सच्चे भाव से पुनः दीपक जलाएं।#दीपक बुझना#शकुन अपशकुन#पूजा