तंत्र साधनाधूमवती मंत्र जपने का समयधूमावती साधना हमेशा अमावस्या या मध्यरात्रि में एकांत स्थानों पर की जाती है। गृहस्थों के लिए इस मंत्र का जप वर्जित माना गया है, यह मुख्यतः संन्यासियों के लिए है।#धूमवती#अलक्ष्मी#अघोर
तंत्र साधनातंत्र में शक्तिपात के समय क्या अनुभव होता है?गुरु → शिष्य ऊर्जा transfer। कंपन/गर्मी-ठंडक/विद्युत, रोना/हंसना/आनंद, प्रकाश/देवता दर्शन, नाद, शून्यता। स्पर्श/दृष्टि/मंत्र से। काश्मीर शैव: तीव्र/मध्यम/मंद। अनुभव व्यक्तिगत।#शक्तिपात#अनुभव#गुरु
तंत्र साधनातंत्र में कुंडली दोष निवारण कैसे किया जाता है?कुंडली दोष तांत्रिक निवारण: मंगल दोष — हनुमान चालीसा + मंगल मंत्र। काल सर्प — नागबलि + राहु-केतु मंत्र। शनि — शनि मंत्र 23,000 + हनुमान चालीसा। पितृ — तर्पण + श्राद्ध। सर्वदोष — नवग्रह यंत्र + रुद्राभिषेक। योग्य ज्योतिषी से परामर्श अनिवार्य।#कुंडली दोष#ग्रह शांति#मंगल दोष
तंत्र साधनातंत्र में कुल पूजा और समय पूजा में क्या अंतर है?समय पूजा: आन्तरिक — षट्चक्रों में ध्यान, कुंडलिनी योग, सात्विक, मोक्ष-प्रधान (शंकराचार्य परम्परा)। कुल पूजा: बाह्य+आन्तरिक — यंत्र, हवन, पंचमकार सम्भव, भोग+मोक्ष (कुलार्णव तंत्र)। अभिनवगुप्त: दोनों का चरम लक्ष्य एक — शिव-शक्ति ऐक्य।#कुल पूजा#समय पूजा#कौलाचार