विस्तृत उत्तर
मंत्र जप से आध्यात्मिक शक्ति का वर्णन भागवत पुराण और तंत्र शास्त्र में है:
आध्यात्मिक शक्ति = तप का फल
भागवत पुराण: 'तपो जपश्च स्वाध्यायः शौचं तुष्टिरथार्जवम्।' — तप के अंगों में जप सर्वश्रेष्ठ है। जप = तप।
आध्यात्मिक शक्ति के रूप
1अंतर्ज्ञान (Intuition)
nित्य जप से 'आज्ञा चक्र' (तीसरा नेत्र) जागृत होता है — अंतर्ज्ञान और दूरदर्शिता बढ़ती है।
2वाक् सिद्धि
योग शास्त्र: नित्य जप से 'विशुद्धि चक्र' (कंठ) जागृत → जो भी बोला जाए वह सत्य होता है — वाक् सिद्धि।
3संकल्प शक्ति
मन की शक्ति बढ़ती है। जो संकल्प करें — वह पूर्ण होता है।
4कर्म क्षय
भागवत: नाम जप से संचित कर्म (जो अभी तक फल नहीं दिए) क्षय होते हैं।
5भय का नाश
जिसे ईश्वर का बल मिल गया — उसे सांसारिक भय नहीं। यही सबसे बड़ी आध्यात्मिक शक्ति है।
6साक्षात्कार
नित्य जप का अंतिम फल — इष्ट देव का साक्षात्कार (दर्शन)।
विनम्रता
तंत्र शास्त्र: आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन न करें — शक्ति नष्ट होती है।





