विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना से आध्यात्मिक शक्ति का वर्णन कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में है:
हाँ — और यही तंत्र का मुख्य उद्देश्य है।
आध्यात्मिक शक्ति के रूप
1वाक् सिद्धि
तंत्र साधक की वाणी — जो बोले वह होता है। 'वाक् सिद्धि' — तंत्र साधना का प्रमुख फल।
2संकल्प शक्ति
नित्य तंत्र साधना — मन की संकल्प शक्ति बढ़ती है।
3ओज और तेज
ब्रह्मचर्य + तंत्र साधना = ओज। साधक के चेहरे पर विशेष 'तेज' प्रकट होता है।
4अष्ट सिद्धियाँ
महानिर्वाण तंत्र: नित्य साधना → अणिमा, महिमा आदि अष्ट सिद्धियाँ।
5अंतर्ज्ञान
tंत्रालोक: उन्नत साधक में 'दिव्य दृष्टि' — अदृश्य को देखने की शक्ति।
6निर्भयता
तंत्र में भय = अज्ञान। साधना से ज्ञान बढ़ता है → भय नष्ट → परम आत्मशक्ति।
चेतावनी
शक्ति का प्रदर्शन — शक्ति नष्ट करता है। कुलार्णव: 'गुप्त साधक ही सिद्ध होता है।'





