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विस्तृत उत्तर
८४-अंश सिद्धान्त के अनुसार शरीर के कुल ८४ अंशों में से २८ अंश स्वयं यजमान से जुड़े हैं। ये २८ अंश व्यक्ति के अपने जीवनकाल के भोजनादि, तप और कर्मों से उपार्जित होते हैं। अर्थात शरीर में केवल पूर्वजों का ही योगदान नहीं माना गया, बल्कि व्यक्ति अपने आहार, तप, जीवनचर्या और कर्मों से भी अपने अस्तित्व का एक भाग बनाता है। शेष ५६ अंश पूर्वजों से आनुवंशिक परंपरा के रूप में प्राप्त होते हैं।
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