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विस्तृत उत्तर
श्रीविष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार ध्रुवलोक से एक करोड़ योजन ऊपर महर्लोक स्थित है। महर्लोक में कल्पान्त तक रहने वाले भृगु आदि महान सिद्धगण निवास करते हैं। नैमित्तिक प्रलय के समय जब प्रलय की अग्नि का ताप महर्लोक तक पहुँचता है, तब महर्लोक में निवास करने वाले भृगु आदि ऋषि उस असहनीय ताप से बचने के लिए महर्लोक को छोड़कर उससे ऊपर स्थित जनलोक में चले जाते हैं।
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