विस्तृत उत्तर
बिल्वपत्र (बेलपत्र) शिव को सर्वाधिक प्रिय है, किन्तु इसे तोड़ने के शास्त्रीय नियम अत्यंत कठोर हैं:
तोड़ने से पूर्व
- 1बिल्व वृक्ष को प्रणाम करें — वृक्ष को 'श्रीवृक्ष' और 'शिवद्रुम' कहा गया है।
- 2यह मंत्र पढ़ें: 'अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियः सदा। गृह्यामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात्॥'
- 3केवल बेलपत्र ही तोड़ें — टहनी या शाखा नहीं।
- 4डंठल तोड़कर ही शिव को अर्पित करें।
वर्जित तिथियां — इन दिनों बेलपत्र न तोड़ें
- ▸सोमवार — शिव का दिन, बेलपत्र तोड़ना वर्जित (पहले दिन तोड़कर रख लें)।
- ▸चतुर्थी तिथि
- ▸अष्टमी तिथि
- ▸नवमी तिथि
- ▸चतुर्दशी तिथि
- ▸अमावस्या तिथि
- ▸संक्रांति काल
- ▸तिथि के समापन और प्रारंभ के बीच का संधिकाल
समय
- ▸दोपहर 12 बजे के बाद बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
- ▸प्रातःकाल सूर्योदय के बाद सर्वोत्तम समय है।
- ▸मंगलवार और रविवार को भी बेलपत्र न तोड़ने का निर्देश कुछ परंपराओं में मिलता है।
बेलपत्र की गुणवत्ता
- ▸त्रिदलीय (तीन पत्तियों वाला) होना अनिवार्य।
- ▸2 या 4 पत्तियों वाला बेलपत्र अशुभ है।
- ▸कटा-फटा, छिद्रयुक्त या धारीदार बेलपत्र न चढ़ाएं।
- ▸कीड़ा लगा हुआ बेलपत्र भी वर्जित।
पुनः उपयोग
शिव पुराण के अनुसार बेलपत्र तोड़ने के 3 माह तक स्वच्छ और ताजा माना जाता है। एक बेलपत्र को तीन बार तक धोकर प्रयोग किया जा सकता है। किन्तु किसी अन्य देवता को अर्पित बेलपत्र शिव को कभी न चढ़ाएं।





