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श्रीलिङ्गमहापुराण प्रश्नोत्तरी — 578 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीलिङ्गमहापुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 578 प्रश्न

पाप प्रायश्चित

गोहत्या और स्त्रीहत्या का उपाय क्या है?

गोहत्या, कृतघ्नता और स्त्रीहत्या जैसे पापों के लिए दस हजार अघोर मंत्र जप से पापमुक्ति बताई गई है।

गोहत्यास्त्रीहत्याकृतघ्न
पाप प्रायश्चित

क्रोध में किए पाप कैसे मिटते हैं?

क्रोधपूर्वक किए गए पापों के लिए अघोर मंत्र का आठ गुना जप बताया गया है।

क्रोध में पापअघोर मंत्रआठ गुना जप
पाप प्रायश्चित

जानबूझकर किए पाप कैसे मिटते हैं?

जानबूझकर किए गए पापों के लिए अघोर मंत्र का चार गुना जप बताया गया है।

जानबूझकर पापबुद्धिपूर्वक पापअघोर मंत्र
मानसिक-वाचिक पाप

मन के पाप कैसे मिटते हैं?

मानसिक पापों के लिए वाचिक पाप की जप-संख्या से भी आधा अघोर मंत्र जप बताया गया है।

मानसिक पापमन के पापअघोर मंत्र
मानसिक-वाचिक पाप

वाणी के पाप कैसे मिटते हैं?

वाचिक पापों के लिए अघोर मंत्र का पचास हजार जप बताया गया है, क्योंकि ब्रह्महत्या के एक लाख जप का आधा वाचिक पाप के लिए कहा गया है।

वाचिक पापवाणी के पापअघोर मंत्र
महापातक प्रायश्चित

ब्रह्महत्या का प्रायश्चित क्या है?

ब्रह्महत्या के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप से मुक्ति कही गई है; दूसरे स्थान पर ऐसे नराधम के लिए दस लाख मानस जप भी बताया गया है।

ब्रह्महत्याप्रायश्चितअघोर मंत्र
महापातक प्रायश्चित

महापातक से मुक्ति कैसे बताई गई है?

महापातक से मुक्ति के लिए अघोर मंत्र जप, पंचगव्य-विधि, हवन, शिवस्नान, उपवास और गायत्री जप का विधान बताया गया है।

महापातकब्रह्महत्यासुरापान
अघोर मंत्र

अघोर मंत्र से कौन से पाप मिटते हैं?

अघोर मंत्र से महापातक, उपपातक, मानसिक, वाचिक, कायिक, मिश्रित, प्रासंगिक और जानबूझकर किए गए पापों का नाश बताया गया है।

अघोर मंत्रपाप मुक्तिमहापातक
अघोर मंत्र

अघोर मंत्र क्यों जपा जाता है?

अघोर मंत्र सभी प्रकार के पातक, उपपातक, मानसिक, वाचिक, कायिक और अनेक पापों की शुद्धि के लिए जपा जाता है।

अघोर मंत्रअघोरेश्वरशिव
अघोर फल

अघोर शिव का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?

योग के द्वारा महादेव का ध्यान करने वाले मनीषी अविनाशी भगवान् रुद्र के दिव्य लोक को प्राप्त होते हैं।

अघोर ध्यानमहादेवयोग
शिवस्थान

शिव का निर्विकार और निर्गुण स्थान क्या बताया गया है?

शिव का स्थान महेश्वर का निर्विकार, निर्गुण, विश्वरूप और ऐश्वर्यमय स्थान बताया गया है।

निर्विकारनिर्गुणविश्वरूप
महायोग

महायोग का उपदेश किसे दिया गया?

अघोर परमेश्वर की उपासना करने के बाद चार कुमारों ने अपने शिष्यों को महायोग का उपदेश दिया।

महायोगउपदेशशिष्य
अघोर कुमार

चार कृष्णवर्ण कुमारों का स्वरूप कैसा था?

वे कृष्णवर्ण, कृष्णमाला से विभूषित और कृष्ण अंगराग से अनुलिप्त महात्मा कुमार बताए गए हैं।

कृष्णवर्ण कुमारकृष्णमालाकृष्ण अंगराग
अघोर कुमार

अघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?

अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।

चार कुमारकृष्णकृष्णशिख
अघोर दर्शन

अघोर शिव ने ब्रह्मा को दर्शन कैसे दिया?

ब्रह्मा ने ध्यान और शरणागति से अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर ध्यान किया, तब अघोर महादेव ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया।

अघोर दर्शनब्रह्माध्यान
अघोर उपासना

प्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना कैसे बताई गई है?

ध्यानयुक्त मन, प्राणायाम और हृदय में महेश्वर को धारण करके अघोररूप परमेश्वर की शरण लेना उपासना रूप में बताया गया है।

प्राणायामध्यानउपासना
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?

ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।

ब्रह्माअघोरशरणागति
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा का वर्ण काला कैसे हुआ?

प्रजासृष्टि की इच्छा से चिंतनमग्न और पुत्रकामना से ध्यानरत होने पर ब्रह्मा का वर्ण काला बताया गया है।

ब्रह्माकृष्णवर्णध्यान
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने प्रजा-सृष्टि के लिए क्या किया?

ब्रह्मा प्रजासृष्टि की इच्छा से दुःखित होकर विचारमग्न हुए और पुत्र की कामना से ध्यान करने लगे।

ब्रह्माप्रजासृष्टिचिंतन
असित कल्प

सृष्टि से पहले क्या स्थिति बताई गई है?

प्रजासृष्टि से पहले एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल व्याप्त बताया गया है।

सृष्टिजलप्रजासृष्टि
असित कल्प

असित कल्प क्या है?

असित कल्प पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त ब्रह्मा का दूसरा कल्प बताया गया है।

असित कल्पकल्पब्रह्मा
अघोर रूप

अघोर शिव का रूप कैसा बताया गया है?

अघोर शिव का रूप कृष्णवर्ण, तेजस्वी, कृष्ण वस्त्र-पगड़ी, कृष्ण मुकुट, यज्ञोपवीत और कृष्ण अंगराग से युक्त बताया गया है।

अघोर रूपकृष्णवर्णकृष्ण वस्त्र
अघोर महिमा

अघोर शिव कौन हैं?

अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।

अघोरशिवमहादेव
तत्पुरुष फल

पुनर्जन्म के बंधन से कैसे छूटा जा सकता है?

नियतात्मा, ध्यानपरायण और जितेन्द्रिय होकर महेश्वर की शरण लेने से साधक पुनर्भव के बंधन से छूटता है।

पुनर्जन्मपुनर्भवमुक्ति

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।