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श्रीमद्भगवद्गीता · अर्जुन विषाद योग

श्लोक 17

अर्जुन विषाद योग · Arjuna Vishada Yoga

मूल पाठ

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः | धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये।

English Meaning

The king of Kasi, an excellent archer, Sikhandi, the mighty car-warrior, Dhrishtadyumna and Virata and Satyaki, the unconquered.

The king of Kasi, an excellent archer, Sikhandi, the mighty car-warrior, Dhrishtadyumna and Virata and Satyaki, the unconquered.

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